Saturday, July 9, 2011

संपत्ति के सुरक्षित बंटवारे के लिए बनाएं साफ वसीयत - Navbharat Times

संपत्ति के सुरक्षित बंटवारे के लिए बनाएं साफ वसीयत - Navbharat Times

वसीयत आपकी मृत्यु के बाद आपकी संपत्ति के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह का विवाद खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है, सकीना बाबवानी की रिपोर्ट-

अधिकतर लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि उनकी संपत्ति का वारिस कौन होगा, लेकिन कई लोग इस बात को कागजात में दर्ज करना भूल जाते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि इसी वजह से कई अमीरों की मौत के बाद उनके कई वारिस सामने आ जाते हैं और फिर लंबी कानूनी विवाद चलता रहता है। अगर आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपकी पोती को उसका पसंदीदा पियानो मिले, तो बेहतर होगा कि आप इसे अपनी वसीयत में दर्ज करें।

वारमंड ट्रंस्टीज ऐंड एग्जिक्यूटर्स के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप नरलेकर का कहना है, 'अपनी संपत्ति की योजना बनाने की दिशा में वसीयत पहला कदम होता है। इसकी मदद से आप जीवित रहते अपनी प्रॉपर्टी को सुरक्षित करने का रास्ता बनाते हैं। आपके निधन के बाद सही व्यक्तियों के बीच प्रॉपर्टी के बंटवारे का यह उचित तरीका है।'

वसीयत का मूल ढांचा
वसीयत बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। आपको बहुत कानूनी या तकनीकी शब्दों के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। स्पष्ट शब्दों में आप अपनी बातों को रखें। अगर अस्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखेंगे, तो आपका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। नरलेकर ने कहा, 'अगर कुछ शब्दों को इधर-उधर कर दें तो कई अंग्रेजी वाक्यों का अर्थ ही बदल जाता है। वसीयत अगर ठीक से नहीं लिखी गई है, तो उसका होना या न होना एकसमान है।' नरलेकर के पास कुछ टिप्स हैं, जिनकी मदद से आप आसान शब्दों में वसीयत बना सकते हैं। वह कहते हैं, 'आप अपनी वसीयत से उन शब्दों को हटा दें, जिनसे एक ही शब्द के दो मतलब निकलते हों। आप सभी शब्दों का चयन ठीक से करें और उसे सही संदर्भ में लिखें।'

कभी भी वसीयत में उपनाम या अपूर्ण नाम नहीं लिखना चाहिए। आप जिस व्यक्ति को अपनी संपत्ति देना चाहते हैं, उस व्यक्ति का पूरा नाम लिखें। कोटक वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज के हेड जयदीप हंसराज का कहना है, 'हम जिसे अपनी प्रॉपर्टी सौंपना चाहते हैं, उसका पूरा नाम साफ शब्दों में लिखें।' आप वसीयत में साफ शब्दों में लिखें कि किसे कितना और क्या देना है। अगर आपके घर में 10,000 रुपए नकद हैं और आप उसे अपनी बेटी को देना चाहते हैं, तो वसीयत में स्पष्ट शब्दों में इसका उल्लेख करें। आप लिखें कि आपके घर पर जो 10,000 रुपए नकद पड़ा हुआ है, उसे आपकी बेटी को सौंप दिया जाए। अगर आप इसकी जगह यह लिखते हैं कि मैं नकदी अपनी बेटी को देना चाहता हूं, तो यह अस्पष्ट है और इससे भविष्य में दिक्कत पैदा हो सकती है।

इस बात का भी ख्याल रखें कि वसीयत को स्टांप पेपर पर ही लिखना जरूरी नहीं होता है। आप एक सादे कागज पर भी आसान शब्दों में लिख सकते हैं। हंसराज का कहना है, 'इस समय कई तरह की वसीयत आ रही हैं। कुछ लोग वीडियो रिकॉर्डिंग में वसीयत लिख रहे हैं, लेकिन आप हमेशा सामान्य पेपर पर अपनी वसीयत बना सकते हैं।' वसीयत का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं होता है। नरलेकर कहते हैं, 'हालांकि, आपको सलाह दी जाती है कि आप वसीयत को रजिस्टर कराएं, ताकि उसका फायदा मिल सके।'

एग्जिक्यूटर नियुक्त करना
अधिकतर एक्सपर्ट इस बात पर सहमत हैं कि किसी भी व्यक्ति को वसीयत के लिए एक एग्जिक्यूटर रखना चाहिए। एग्जिक्यूटर वह व्यक्ति होता है, जो यह देखता है कि वसीयत में आपकी ओर से दर्ज बातों को आपकी इच्छानुसार अमली जामा पहनाया जा रहा है या नहीं।

हंसराज का कहना है, 'यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप अपनी वसीयत में एग्जिक्यूटर का नाम दर्ज करें। कई लोग एग्जिक्यूटर को नियुक्त करना भूल जाते हैं।' नरलेकर कहते हैं, 'अगर वसीयत में एग्जिक्यूटर का नाम नहीं है, तो कोर्ट इस ड्यूटी को निभाने के लिए एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त कर सकती है। यह संभव है कि कोर्ट जिसे एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करे, वह उतने अच्छे तरीके से वसीयत को लागू न करे, जैसा आपका एग्जिक्यूटर करता।'

वसीयत और प्रोबेट
भारतीय उत्तराधिकार कानून के मुताबिक वसीयत को तभी लागू माना जाता है, तब वह उचित रूप से अटेस्टेड और हस्ताक्षरित हो। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उस वसीयत को खत्म नहीं किया जा सकता है। आप अपनी मर्जी से जितनी बार चाहेंगे, उतनी बार अपनी वसीयत में बदलाव कर सकते हैं। अगर आपने अपनी वसीयत में उसे खत्म नहीं करने संबंधी कोई शर्त जोड़ दी है, तब भी आप उसे बदल सकते हैं। हंसराज का कहना है, 'वसीयत बनाने वाला लगभग हर व्यक्ति एक सामान्य गलती करता है कि उसे वह अपडेट नहीं करता है। अगर उनके घर में पोता या पोती पैदा हुई है, तब उन्हें उसके मुताबिक वसीयत में बदलाव करना चाहिए। इस बात का ख्याल रखें कि आपकी वसीयत ताजातरीन घटनाओं के अनुसार अपडेट हो।'

वसीयत को वापस लेने का तरीका बहुत आसान है। जैसे ही आप नई वसीयत बनाते हैं, पुरानी वसीयत अपने आप बेकार मान ली जाती है, हालांकि, इसके लिए नई वसीयत का ठीक ढंग से लागू हो जाना जरूरी है और अगर ऐसा नहीं होता है, तो पुरानी वसीयत जारी रहेगी। अगर आप वसीयत को नष्ट कर देते हैं या जला देते हैं, तब भी वह खत्म मान ली जाएगी।

प्रोबेट वह प्रक्रिया होती है, जिसके तहत कोई भी वसीयत करने वाला व्यक्ति एडमिनिस्ट्रेशन की इजाजत से सक्षम न्यायालय से अपनी वसीयत को सटिर्फाई कराता है। प्रोबेट हो जाने के बाद कोई इस आधार पर वसीयत को चुनौती नहीं दे सकता है कि वसीयत करते समय वसीयत करने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति अच्छी नहीं थी। नरलेकर का कहना है, 'प्रोबेट कराना अनिवार्य नहीं होता है, लेकिन इसे करा लेने की सलाह दी जाती है।'

किन स्थितियों में वसीयत होगी बेकार
भारतीय उत्तराधिकार कानून के मुताबिक, 11 स्थितियों में आपकी वसीयत बेकार हो सकती है। इसमें एक सामान्य कारण तो यह है कि अगर संपत्ति का कोई हिस्सा ऐसे व्यक्ति को स्थानांतरित करने की बात हो, जो बतौर गवाह वसीयत पर हस्ताक्षर कर रहा हो, तो वसीयत बेकार साबित हो सकती है। कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई प्रॉपर्टी उस व्यक्ति या उसके पति/पत्नी को स्थानांतरित की जा रही हो, जिसने हस्ताक्षर किया है, तब यह बेकार हो जाता है। हंसराज का कहना है, 'इसके पीछे तर्क यही है कि इसमें हितों का टकराव का मामला बनता है। इससे साफ है कि जो व्यक्ति हस्ताक्षर कर रहा है, वह वसीयत के बारे में सब कुछ जानता था।' अस्पष्ट शब्दों के चयन से भी वसीयत बेकार हो सकती है। दूसरे कारणों में वसीयत में ऐसी शर्त को शामिल करना, जो संभव नहीं हो, तब भी वसीयत के औचित्य पर सवाल खड़ा होगा।

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