Monday, September 26, 2011

जब हों संपत्ति के कई साझेदार- Navbharat Times

जब हों संपत्ति के कई साझेदार- Navbharat Times:

कई लोग बजट ज्यादा न होने की स्थिति में साझेदारीकरके प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं। हालांकि इस दौर परआपको इसके तमाम कानूनी पहलुओं के बारे में भीजानकारी जरूर रखना चाहिए। अगर किसी प्रॉपर्टी कामालिकाना हक एक से च्यादा व्यक्तियों के नाम हो तो इसेजॉइंट ओनरशिप या साझा मालिकाना हक कहते हैं।

बंटवारे के जरिए को - ओनरशिप को इकलौते मालिकानाहक में भी तबदील किया जा सकता है। अगर किसी प्रॉपर्टीमें किसी का शेयर है तो इसका मतलब हुआ कि उस प्रॉपर्टीका जॉइंट ओनरशिप है। को - आनर के पास प्रॉपर्टी परकब्जे का अधिकार , उसका इस्तेमाल करने का अधिकारऔर यहां तक कि उसे बेचने तक का अधिकार होता है।पैतृक संपत्ति में बेटे बेटियों का साझा समान हिस्साहोता है।

टेनेंट्स इन कामन को - ओनरशिप का एक प्रकार है लेकिन इस तरह की को - आनरशिप के बारे में कानूनीदस्तावेजों पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया है। पूरी प्रॉपर्टी में प्रत्येक टेनेंट इन कामन का अलग - अलग हितहोता है। अलग - अलग हित होने के बावजूद प्रत्येक टेंनेंट इन कामन के पास यह अधिकार होता है कि वह पूरीप्रॉपर्टी का पजेशन रख सकता है या उसे इस्तेमाल कर सकता है।

यह जरूरी नहीं कि पूरी प्रॉपर्टी में प्रत्येक टेनेंट इन कामन का अलग - अलग लेकिन बराबर हित हो। पूरी प्रॉपर्टीमें उनके हक एक दूसरे से कम अथवा ज्यादा भी हो सकते हैं। उन सबके पास अपने - अपने हित दूसरे के पासहस्तांतरित करने का अधिकार भी होता है लेकिन उनके पास सरवाइवरशिप का अधिकार नहीं होता। ऐसे मेंकिसी टेनेंट इन कामन की मौत के बाद उनका हित वसीयत या फिर कानून के मुताबिक हस्तांतरित होता है।

जिस व्यक्ति के नाम यह हस्तांतरण होता है वह को - आनर्स के साथ टेनेंट इन कामन बन जाता है। जाइंट टेनेंसी मेंसरवाइवरशिप का अधिकार होता है। किसी ज्वाइंट टेंनेंट की मौत के बाद प्रॉपर्टी में उनका हित तत्काल बाकीजीवित बचे ज्वाइंट टनेंट्स के नाम हस्तांतरित हो जाता है। ज्वाइंट टेनंट्स पूरी प्रॉपर्टी में एक एकीकृत हित केअधिकारी होते हैं। प्रत्येक जाइंट टेनेंट का प्रॉपर्टी में बराबर का हिस्सा होना चाहिए। बशर्ते इससे दूसरे जाइंटटेनेंट के अधिकारों का हनन नहीं होता हो। जाइंट टेंनेंसी हासिल करने के लिए कई शर्ते पूरी करनी होती हैं। जाइंटटेनेंट के हित अलग - अलग नहीं हो सकते और वे अपेने हित एक ही तरीके से भुना सकते है।

जॉइंट टेनेंसी वसीयत या डीड के जरिए बहाल कराई जा सकती है। इस तरह को - ओनरशिप खासकर पति -पत्नी के लिए है क्योंकि इसमें सरवाइवरशिप का अधिकार हासिल है। यानी किसी एक की मौत के बाद उसकाहिस्सा स्वत : जीवित ओनर के पास हस्तांतरित हो जाता है। इस तरह की ओनरशिप के तहत पति - पत्नी में सेकिसी को भी अपना हित किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं है। हालांकि पति या पत्नीआपस में यह हस्तांतरण कर सकते हैं।

इस तरह की टेनेंसी तलाक , पति - पत्नी में से किसी एक की मौत या फिर पति - पत्नी के बीच आपसी करार केजरिए ही खत्म की जा सकती है। ट्रांसफर आफ प्रॉपर्टीज एक्ट , 1982 की धारा 44 में किसी को - ओनर द्वाराअपने अधिकार हस्तांतरित किए जाने से संबंधित नियमों का उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक , किसी अचलसंपत्ति का को - ओनर कानूनी तौर पर संपत्ति पर अपनी हिस्सेदारी हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरणपाने वाले व्यक्ति के पास हस्तांतरण करने वाले के सारे अधिकार जाते हैं और वह प्रॉपर्टी के बंटवारे की मांगभी कर सकता है।

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