Saturday, March 5, 2011

आखिर किस डीड की कराएं रजिस्ट्री -प्रॉपर्टी-बिज़नस-Navbharat Times

आखिर किस डीड की कराएं रजिस्ट्री -प्रॉपर्टी-बिज़नस-Navbharat Times


कानूनन 100 रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी की डील के लिए तैयार हर डीड को इलाके के रजिस्ट्री ऑफिस में रजिस्टर्ड कराना जरूरी होता है। कह सकते हैं कि हर डॉक्युमेंट को ही रजिस्टर्ड कराना चाहिए।

प्रॉपर्टी की खरीदारी से जुड़े कई कागजों का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। इस बारे में दिशा-निर्देश देने के लिए 'इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट 1902' बनाया गया है। इसमें स्पष्ट है कि किन कागजात को रजिस्टर्ड कराना जरूरी है और किन्हें नहीं। इस एक्ट के अलावा कुछ कागजात का रजिस्ट्रेशन 'दि ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882' के अनुसार भी किया जाता है।

' इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट 1902' के सेक्शन 17 के अनुसार, निम्नलिखित कागजात को रजिस्टर्ड कराना जरूरी होता है :

- अचल संपत्ति को गिफ्ट के रूप में देने से जुड़े कागज। हर मूल्य की प्रॉपर्टी की गिफ्ट डीड रजिस्टर्ड कराना जरूरी है।

- गैर-वसीयत वाले ऐसे कागजात, जिनसे अचल संपत्ति में अधिकार, दावा या रुचि साबित हो, इनका हनन हो या इनके संबंध में किसी लेनदेन के बारे में बताया जाए।

- ज्यादातर मॉगेर्ज डीड।

' दि ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882' के सेक्शन 54 के अंतर्गत किसी भी अचल संपत्ति को बेचने पर डील के कागजात रजिस्टर्ड कराने पड़ते हैं।

हालांकि 100 रुपये से कम कीमत में प्रॉपर्टी बेचने पर सेल डीड को रजिस्टर्ड कराने से छूट दी गई है। वास्तव में, यह संभव नहीं होता, इसलिए कह सकते हैं कि हर सेल डीड की रजिस्टर्ड कराना जरूरी है। 'इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट 1902' के सेक्शन 49 के अनुसार, रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी कागजात में से अगर किसी को रजिस्टर्ड नहीं कराया जाता है, तो उससे जुड़ी डील कानूनन मान्य नहीं होगी। इन कागजात को किसी कानूनी केस में सुबूत के तौर पर भी पेश नहीं किया जा सकता। हालांकि 'दि ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882' के सेक्शन 53 ए के अनुसार दि स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट के अंतर्गत बताए गए खास मामलों में गैर पंजीकृत कागजात को भी सुबूत माना जा सकता है

No comments: