Friday, April 22, 2011

जिसका ज्यादा हिस्सा, कागजात उसके -प्रॉपर्टी-बिज़नस-Navbharat Times

जिसका ज्यादा हिस्सा, कागजात उसके -प्रॉपर्टी-बिज़नस-Navbharat Times

कई बार कोई प्रॉपर्टी एक से ज्यादा लोग खरीद लेते हैं, तो उस स्थिति में यह प्रावधान भी है कि प्रॉपर्टी के असली कागजात ज्यादा हिस्से वाले व्यक्ति के पास रहेंगे। ऐसे ही कुछ और प्रावधानों की जानकारी देता है ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट :

' द ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट 1882' के अनुसार, ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के योग्य है, किसी भी तरह की प्रॉपर्टी ट्रांसफर कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति ट्रांसफर के खिलाफ केस दर्ज करता है, तो उसे इसके समर्थन में किसी कानून या परंपरा का हवाला देना जरूरी है।

रहें सावधान
1. भले ही प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने वाला आपका कोई नजदीकी हो, लेकिन हर डील लिखित में फाइनल करना बेहतर है। भूलकर भी प्रॉपर्टी के कागजात की फोटोकॉपी से संतुष्ट न हों। ट्रांसफर के दौरान मूल कागजात जरूर हासिल कर लें।

2. अगर प्रॉपर्टी दूसरी बार बेची जा रही है, तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह कहीं गिरवी न हो या उस पर बैंक लोन न लिया गया हो। इस बारे में रजिस्ट्रार ऑफिस से सही जानकारी ली जा सकती है।

कानूनी भाषा में प्रॉपर्टी के ट्रांसफर से मतलब ऐसी प्रक्रिया से है, जिससे प्रॉपर्टी का मालिकाना हक एक पक्ष से दूसरे पक्ष के हाथों में पहुंच जाए। 'द ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट 1882' के अनुसार, ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के योग्य है, किसी भी तरह की प्रॉपर्टी ट्रांसफर कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति ट्रांसफर के खिलाफ केस दर्ज करता है, तो उसे इसके समर्थन में किसी कानून या परंपरा का हवाला देना जरूरी है। इसके अलावा, पूरी प्रॉपर्टी ही नहीं, इसका कुछ हिस्सा भी ट्रांसफर किया जा सकता है।

दरअसल, प्रॉपर्टी की बिक्री या खरीद के किसी भी कॉन्ट्रैक्ट में खरीदार और विक्रेता दोनों को कुछ न कुछ अधिकार दिए जाते हैं, जबकि दोनों पर ही कुछ जिम्मेदारियां भी तय होती हैं। इस संबंध में सभी प्रमुख प्रावधान 'ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट' से निर्धारित होते हैं।

सब कुछ बताएं
' द ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट 1882' के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट न होने पर भी प्रॉपर्टी के विक्रेता के पास कुछ अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं। विक्रेता को प्रॉपर्टी बेचने से पहले उस प्रॉपर्टी से जुड़ी सभी बातें खरीदार को बताना कानूनन जरूरी है। इन बातों में प्रॉपटीर् या इसके टाइटिल में ऐसी कोई कमी भी शामिल है, जो सामान्य तौर पर पकड़ी नहीं जा सकती।

कागजात देना जरूरी नहीं
प्रॉपर्टी की बिक्री के समय विक्रेता को प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात खरीदार को ट्रांसफर कर देने चाहिए, लेकिन इस नियम के दो अपवाद भी हैं -

1. यदि विक्रेता प्रॉपर्टी का ऐसा कोई भाग अपने पास रखता है, जिसका उल्लेख कागजात में भी है, तो वह इन कागजात को खरीदार को न देकर अपने पास रख सकता है।

2. यदि एक प्रॉपर्टी एक से ज्यादा खरीदारों को बेची गई है, तो प्रॉपर्टी के कागजात उस खरीदार के पास रहेंगे, जिसका हिस्सा सबसे ज्यादा हो।

इन दोनों मामलों में यह ध्यान देना होगा कि एक ही प्रॉपर्टी कई व्यक्तियों से संबंधित हो गई है। ऐसे में कागजात की जरूरत किसी को भी पड़ सकती है। इस स्थिति में जिस व्यक्ति के पास कागजात हैं, उसे खरीदार या अन्य पक्षों द्वारा कागजात मांगने पर कागजात दिखाने होंगे और उनकी फोटोप्रति उपलब्ध करानी होगी। हालांकि इस पर आने वाला सारा व्यय कागजात मांगने वाला पक्ष उठाएगा।

टैक्स चुकाना होगा
सेल कॉन्ट्रैक्ट की तिथि और प्रॉपर्टी की सुपुर्दगी के बीच के समय प्रॉपर्टी और कागजात की देखभाल करने की जिम्मेदारी भी प्रॉपर्टी बेचने वाले की ही तय की गई है। साथ ही बिक्री की तिथि के दिन तक विक्रेता को ही प्रॉपर्टी से जुड़े सभी टैक्स इत्यादि अदा करने होंगे।

लाभ बेचने वाले का
दूसरी ओर, प्रॉपर्टी का मालिकाना हक खरीदार को ट्रांसफर होने तक प्रॉपर्टी से प्राप्त किराये व अन्य लाभ पाने का अधिकारी विक्रेता होगा। यदि प्रॉपर्टी का मालिकाना हक पूरी रकम लेने से पहले ही ट्रांसफर कर दिया गया है, तो विक्रेता बकाया रकम पर कोई चार्ज लगा सकता है। वह पजेशन देने की तिथि से बकाया रकम पर ब्याज वसूलने का भी अधिकारी है।

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